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हम उस देश के वासी हैं जिस देश में गंगा बहती है

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होठों पे सच्चाई रहती है; जहाँ दिल में सफ़ाई रहती है। हम उस देश के वासी हैं, जिस देश में गंगा बहती है। 1960 में निर्मित फिल्म “जिस देश में गंगा बहती है” में शैलेंद्र द्वारा लिखा यह गीत लिखा था जो बरसों तक देश में लोकप्रिय हो गया था। कवि आगे कहता है:  मेहमान जो हमारा होता है; हमें जान से प्यारा होता है; ज़्यादा की नहीं लालच हमको थोड़े मे गुज़ारा होता है। यह गाना राजकपूर पर फिल्माया गया था।क्या 1960 तक हम भारत वासियों के होंठो पर हमेशा सच्चाई ही रहती थी और दिल में सफाई रहती थी। और क्या हम सच में मेहमान को भगवान का रूप समझते आए हैं।  उसी राज कपूर की एक फिल्म जागते रहो में  1956 में प्रेम धवन का एक गीत फिल्माया गया था जिस के बोल थे: ऐवें दुनिया देवे दुहाई झूठा पांदी  शोर। अपने दिल तो पूछ के देखो कौन नहीं है चोर। ते की मैं झूठ बोलया – कोई न। ते की मैं कुफ़र तोलिया – कोई ना।  ते की मैं ज़हर घोलिया – कोई ना भई कोई ना भई कोई ना।  क्या 1956 में हम झूठे, चोर,  डाकू और लुटेरे थे और 1960 आते आते  सच्चाई और दिल की सफाई हमारे अन्दर घर कर गई। और आज हम क्या ...